मेरा अभी कुछ दिनों पहले अपनी बेटी के कॉलेज एडमिशन के लिए अमेरिका के एक अंदरूनी और अनछुए प्रान्त इंडिआना जाना हुआ। ब्लूमिंगटन नाम के एक छोटे से शहर में सन १८२० में इंडिआना यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी।लगभग ३००० एकड़ में फैले केंद्र, राज्य और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की फीस की मदद से चलने वाले २०० वर्षों से भी पुराने इस शैक्षणिक केंद्र में केली बिज़नेस स्कूल और जैकब म्यूजिक स्कूल दुनिया के टॉप १० रैंकिंग में आते हैं। पूरा शहर इसी यूनिवर्सिटी के आस पास बसा है और शहर के सारे रहवासी इस बात का पूरा सम्मान और गर्व करते हैं।ब्लूमिंगटन की कुल अस्सी हज़ार की जनसँख्या में से लगभग ४०,००० से ज्यादा तो यूनिवर्सिटी के बच्चे ही हैं।
पश्चिमी देशों की मेरी धारणा से बिलकुल उलट स्थानीय लोग सीधे और खुले दिल के मिले। आप कहीं भी चले जाइये, आपका मुस्कराहट के साथ स्वागत होगा। दुकानदार, कैब चलने वाला ड्राइवर, होटल का मालिक और यहाँ तक कि बैंक के कर्मचारी भी आपको आपके बच्चे की हिफाज़त का भरोसा दिलाते मिलेंगे। हर स्थानीय व्यक्ति आपको ये विश्वास दिलाएगा कि आपके बच्चे का जीवन का सबसे अच्छा निर्णय उसने ले लिया है; अब आप निश्चिन्त हो जाइये। आने वाले मौसम की कैसी तैयारी करनी है, आपका पसंदीदा खाना शहर के किस रेस्तरां में मिलेगा या लोकल पूजा के लिए मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च कहाँ है, इस पर सभी आपकी मदद करते मिलेंगे। इसे नाम के अनुरूप शहर की काउंटी ने बेहद खूबसूरत तरीके से लैंडस्केप किया है और संवारा है। स्थानीय प्रशासन ने यूनिवर्सिटी के साथ मिल कर शहर में सिटी बस के सञ्चालन को छात्रों के लिए बिलकुल मुफ्त कर रखा है। सुबह ७ बजे से रात्रि ११ बजे तक लगातार सेवा करती ये बसें एकदम आधुनिक और आरामदायक हैं।
इन सभी सुखद अनुभतियो के अलावा जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वो था इंडिआना यूनिवर्सिटी (आई यू) की सांस्कृतिक पहचान । सभी अमेरिकी यूनिवर्सिटी अपनी पढाई के साथ साथ अपनी स्वयं की संस्कृति बनाने के लिए भी जानी जाती हैं। कॉलेज का अपना झण्डा, ख़ास लाल सफ़ेद पहनावा और खुद का गीत भी है। दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ अपेरल और मर्च का टाई अप है। आई यू के छात्रों को 'हूज़र' कहा जाता हैं। जब मैं अपनी बेटी के साथ शिकागो एयरपोर्ट के इमीग्रेशन अधिकारी के सामने पहुंचा उसने यह जानते ही कि वो आई यू में पढ़ने आयी है, तुरंत मुस्कुराते हुए एक हूज़र सलाम ठोका और अमेरिका में स्वागत किया। कॉलेज में सभी बच्चों को आई यू के सभी शिक्षक और कर्मचारी इन्सिटिटूशन के गौरव करने वाले इतिहास और वर्तमान के बारे में लगातार बताते रहते हैं। जैसे कॉलेज बास्केटबॉल टीम का ५ बार का नेशनल चैंपियन होना, या उनकी चीयर लीडर टीम का नेशनल डांस कम्पटीशन में फर्स्ट होना या फुटबॉल टीम का इस बार ड्रीम रन करते हुए कॉलेज चैंपियनशिप में ८-० से अविजित रहना। ओलिंपिक में तो आई यू का एक अलग ही रिकॉर्ड है। इसके बच्चों ने आज तक अमेरिका और दुसरे देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए १२७ मेडल्स जीते हैं।
शिक्षा और खेल में आई यू में दुनिया की बेहतरीन ट्रेनिंग दी जाती है और नए आये बच्चों को उनके रंग या देश से नहीं जाना जाता। कॉलेज के पहले दिन से ही सभी को खास शपथ दिलाई जाती है कि एक बार जो हूज़र बन गया जिंदगी भर वो सिर्फ हूज़र रहता है। पहले यूनिवर्सिटी, फिर राज्य, फिर राष्ट्र।
मैंने ये भी पाया कि अमरीका की स्कूलों की शिक्षा में पाठ्यक्रम भारत के स्कूलों से पीछे है। मेरी बेटी को कॉलेज में पहले दिन ही इतने क्रेडिट मिल गए कि वो चाहे तो ४ साल का कोर्स ३ साल में ख़तम कर सकती है या ४ साल में डुएल डिग्री कर सकती है। पाठ्यक्रम में पीछे होने के बाद भी अमेरिकी बच्चों में रोज़मर्रा के काम और चैलेंज का सामना करने का बेहतरीन ज्ञान है। यूनिवर्सिटी में बच्चों को उनके जीवन के निर्णयों के लिए खुद मुख्तयार बनाने पर जोर होता है। कोई टोका टोकी नहीं। लेकिन ये भी समझा दिया जाता है कि जीवन में कुछ पाना है तो श्रेष्ठ बनना ही होगा। कोई जुगाड़, या बैकडोर एंट्री नहीं होगी। मैंने अपनी बेटी को कुछ ही दिनों में अपने आप सुबह उठना, टाइम पर असाइनमेंट करना, दिए हुए पैसों में काम चलाना और कॉलेज के बाद अपने करियर की चिंता करते देखा।
अमरीकी जीवन शैली के एकाकी और व्यक्तिगत होने के कारण मैंने लगभग सभी बच्चों को पुरे कैंपस में अकेले घूमते हुए ही देखा। एक पिता होने के नाते मुझे इसकी बेशक चिंता हुई। दूर देश में अकेलापन ही सबसे बड़ी समस्या है। जब मेरी बेटी से इस बारे में बात हुई तो उसने बताया कि लोग बेशक आपकी निजता का सम्मान करते हैं। लाइन में भी खड़े होते समय १ मी दूर ही रहते हैं। आपसे आपके परिवार, माता-पिता के बारे में कभी कोई प्रश्न नहीं करते। किन्तु जब आप कहीं भी अनजान लोगों से मिलते हो तो वे मुस्कुरा कर हेलो / गुड मॉर्निंग करते हैं। बात-बात पर थैंक यू और सो सॉरी कहते हैं। बात करना चाहो तो आप से खुल के मिलते हैं। मदद मांगो तो आगे बढ़ के करते हैं। लेकिन वो खुद को आपके ऊपर थोपते नहीं हैं। सारे नियम सभी के लिए सामान रूप से लागु होते हैं। इसलिए बेगानापन नहीं महसूस होता।
मैं और उसकी मां भी अपनी तरफ से कोशिश करते हैं | मोबाइल तकनीक से रोज़ उससे वीडियो कॉल कर लेते हैं। हमने ध्यान रखा है कि उसको हमारा कॉल दखल के रूप में नहीं बल्कि एक मदद के रूप में दिखाई दे। अपने देश और संस्कृति के बारे में खुल के बात करते हैं और दोनों देशों की अच्छाइयों और कमियों पर चर्चाएं करते हैं। मैं ये कोशिश करता हूँ कि बच्चों और हमारी सोच में अंतर हो सकता है, किन्तु कम्युनिकेशन सदैव चलते रहना चाहिए। किसी भी देश की पहचान उनके ग्लोबल सिटीजन ही बनाते हैं। मुझे आशा है कि एक दिन श्रेष्ठ शिक्षा और श्रेष्ठ चरित्र के बलबूते पर मेरी बेटी दुनिया में अपने देश और परिवार का नाम का परचम फ़ैऱायेगी।







9 comments:
बहुत सुंदर, सटीक और विस्तृत विवरण ! आप की लिखनी से हुज़र्स की दुनिया का रोचक विवरण मिला। आपकी बिटिया को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ
आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद
बहुत रोचक, अपनेपन से भरपूर, समसामयिक ज्ञान समेटे हुऐ, सरल सटीक लेखन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
Tumhare likhe hue shabdo se esa laga mein khud IU mein khada hoon. Bahut badhiya tarike se likha hai step by step. Good luck for kuhu bitiya.
बहुत अच्छा लिखा है। नई नई जानकारी मिली। इस ब्लॉग को आगे भी जारी रखें।
सुंदर आंकलन के लिए शुक्रिया। शुभकामनाएं सदैव काम आती हैं।
Thanks dear for your blessings and time
मेरा प्रयास रहेगा कि मैं अपने अनुभव ईमानदारी से साझा करता रहूं। तुमने समय निकाल कर पढ़ा तो मुझे अच्छा लगा।
Post a Comment